मंगलवार, दिसंबर 14, 2010

उस चंचल लड़की के सपने

- डॉ. शरद सिंह


















                                                                       

54 टिप्‍पणियां:

  1. आंसू तो आते जाते हैं ....बहुत खूब ..सुन्दर रचना ..

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  2. जमाने से लड़ने की सीख देती कविता स्वयम एक कसीदा है ! बहुत सुंदर लिखा है शरद जी आपने ! बधाई !

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  3. श्याम कोरी 'उदय'जी, आपको बहुत धन्यवाद!

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  4. संगीता स्वरुप जी,मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद !

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  5. बेहद मर्मस्पर्शी /
    कोमल भावनाओ को बांधना आसान नहीं होता
    एक महिला ही एक स्त्री /बालिका का दर्द पुरुषों से
    बेहतर जान सकती है /

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  6. व्यथा का एक पहलू अभिव्यक्त हुआ -सुन्दर !

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  7. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. खूबसूरत अभिव्यक्ति। साधुवाद।

    महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाइट (www.hindivishwa.org) पर समकालीन रचनाकार संदर्शिका प्रकाशित की गयी है। आपकी प्रोफाइल देखकर लगता है कि आपका नाम वहाँ सम्मिलित होना चाहिए।

    आपका ई-मेल उपलब्ध नहीं है इसलिए इस टिप्पणी के माध्यम से सूचित कर रहा हूँ।

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  9. डा.शरद सिंह जी,
    आप की सुन्दर अभिव्यक्ति मन के तारों को झंकृत करती है !
    साल गुजरते किसने देखा ,देखा है बस परिवर्तन,
    साथ समय के मौसम भी तो,सदा बदलते रहते हैं !
    वाह,क्या कहने !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  10. निवेदन है कि आप फॉण्ट के आकार थोडा बड़ा रखें ताकि हम जैसे कमज़ोर नज़र वाले भी आपके ब्लॉग को आसानी से पढ़ सकें. धन्यवाद.

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  11. आपकी पोस्ट की चर्चा कल (18-12-2010 ) शनिवार के चर्चा मंच पर भी है ...अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे कर मार्गदर्शन करें ...आभार .

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  12. बहुत सुंदर लिखा है आपने !
    खूबसूरत अभिव्यक्ति।
    बधाई!

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  13. बहन शरद जी, बधाई स्वीकार करें खास कर अंतिम बंद के लिए|

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  14. अच्छी गज़ल। मक्ते का शेर लाज़वाब है।
    ..बधाई।

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  15. babanpandey जी, आपने सही कहा। बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  16. अरविन्द मिश्र जी बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  17. ताऊ रामपुरिया जी आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।

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  18. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित समकालीन रचनाकार संदर्शिका में मुझे शामिल किया गया है। http://www.hindivishwa.org/writer_index_1.php#. पर मेरा प्रोफाईल है। आपकी सदीशयता भरी टिप्पणी के लिए आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद बनाए रखें।

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  19. ज्ञानचंद मर्मज्ञ जी बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  20. अश्विनी रॉय “प्रखर”, हार्दिक धन्यवाद। आपके सुझाव पर ध्यान दूंगी।

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  21. डॉ. हरदीप संधु जी हार्दिक धन्यवाद।

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  22. संगीता स्वरुप जी, मैं आपको धन्यवाद भर कहूं तो कम होगा, आपके अपनत्व ने मुझे भावविभोर कर दिया है।

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  23. सुनील कुमार जी हार्दिक धन्यवाद।

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  24. अनुपमा पाठक जी हार्दिक धन्यवाद।

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  25. हार्दिक धन्यवाद अनुपमा पाठक जी।

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  26. सत्यम शिवम जी हार्दिक धन्यवाद।

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  27. मनोज खत्री जी, आपके विचारों के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  28. भाई नवीन जी,मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद! आपका स्वागत है। आपके विचारों के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  29. देवेन्द्र पाण्डेय जी,आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए। हार्दिक धन्यवाद!

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  30. बहुत मार्मिक भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  31. बहुत सुंदर लिखा है आपने !
    खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  32. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा सो आपका फालोवर बन रहा हूँ ! शुभकामनायें

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  33. Adarniya dr. Sharad Singh ji..
    Namaskar
    ...hume apna margdarshan pardan kare....

    regards
    sanjay haryana
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  34. कैलाश जी,मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद! आपका स्वागत है। आपके विचारों के लिए आभारी हूं।

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  35. संजय भास्कर जी बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  36. आपके ब्लॉग मै पहली बार आना हुआ और आई तो जाने का दिल ही नहीं हुआ हम तो जेसे यही के हो कर रह गये !
    बहुत ही मार्मिक रचना बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत की आपने दोस्त !
    बहुत बहुत बधाई !

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  37. मीनाक्षी जी, आभारी हूं आत्मीयता के लिए। आपका सदा स्वागत है। इसी प्रकार अपने विचारों से अवगत करातीं रहें।

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  38. पहली बार पढ़ा आपको -
    बहुत कशिश है आपके लेखन में -
    सीधे सीधे ह्रदय उदगार हैं -
    बहुत अच्छा लगा आपको पढ़कर -
    best wishes.

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  39. कमाल है शरद जी। बस कमाल है। आपकी लेखनी का यह रूप तो सच में कमाल है।
    बार बार पढ़े जा रहा हूं। मन नहीं भर रहा।

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  40. अभिषेक मिश्र जी,
    anupama ji,

    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए। हार्दिक धन्यवाद!

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  41. मनोज कुमार जी,
    मैं आपको धन्यवाद भर कहूं तो कम होगा, मेरी कविता के प्रति आपके अपनत्व ने मुझे भावविभोर कर दिया है।

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  42. यशवन्त माथुर जी,
    आपकी सदाशयता भरी टिप्पणी के लिए आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद बनाए रखें।

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