रविवार, फ़रवरी 27, 2011

उसने उसे पढ़ लिया....


104 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदरता से आपने बस कुछ शब्दों में न जाने कितनी अनकही बात कह गयी...बहुत सुंदर।

    "साहित्य प्रेमी संघ".....(साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त ब्लाग)...आप आये और योगदान करे.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. दिनेशराय द्विवेदी जी,
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए....हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गज़ब की भावाव्यक्ति…………प्रेम की पराकाष्ठा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. Er. सत्यम शिवम जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएं !

    "साहित्य प्रेमी संघ".....(साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त ब्लाग) सचमुच दिलचस्प हैं...मैं उसका अनुसरण कर रही हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वन्दना जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (28-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. पूरी कहानी उस स्पर्श में लिखी थी ! प्रेम की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति !शुभकामनाएँ !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहद दिलचस्प कहन का तरीका बेजोड़ अभिव्यक्ति मध्य प्रदेश की अमृता प्रीतम जी आपको आपकी कविता और कहन की शैली दोनों के लिए बधाई |शरद जी शुभकामनाएँ |०९४१५८९८९१३

    उत्तर देंहटाएं
  9. रश्मि प्रभा जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  10. वन्दना जी,
    बहुत बहुत धन्यवाद चर्चा मंच में शामिल करने के लिए...
    इस अपनत्व और उत्साहवर्द्धन के लिए आभारी हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. रजनीश तिवारी जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. जयकृष्ण राय तुषार जी,
    ‘मध्य प्रदेश की अमृता प्रीतम जी’ कह कर आपने मुझे संकोच में डाल दिया....इस अपनत्व और उत्साहवर्द्धन के लिए आभारी हूं। आपको हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  13. पढ़ कर बस एक ही शब्द मुँह से निकला ....वाह ..

    उत्तर देंहटाएं
  14. प्रवीण पाण्डेय जी,
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  15. रोशी जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपको धन्यवाद...
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।
    हार्दिक आभार......

    उत्तर देंहटाएं
  16. संगीता स्वरुप जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया.
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  17. प्रेमाभिव्यक्ति का सुन्दरतम् अन्दाज...

    उत्तर देंहटाएं
  18. कवियत्री की कल्पना , प्रेम परिपूर्ण भावनाओ की तरंग सी उठा गयी ह्रदय में .

    उत्तर देंहटाएं
  19. संजय भास्कर जी,
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  20. आशीष जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया....
    हार्दिक आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  21. सुशील बाकलीवाल जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं.....
    हार्दिक धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  22. वाह ....बहुत ही खूबसूरत भाव लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  23. वाह! बहुत ही कम शब्दों में इतनी खुबसूरत अभिव्यक्ति! यही तो कविता है!

    उत्तर देंहटाएं
  24. सदा जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  25. कुंवर कुसुमेश जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया....बहुत बहुत आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  26. रचना दीक्षित जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  27. SURINDER RATTI ji,
    Thank you for visiting my blog!
    I feel honored by your comment.....

    उत्तर देंहटाएं
  28. नीलेश माथुर जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने....मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपका आभार...
    आपका स्वागत है।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  29. कैलाश सी. शर्मा जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  30. अमितेश जैन जी,
    आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपका आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  31. बहुत सुन्दर.
    कम शब्द.पूरी की पूरी बात.
    सलाम.

    उत्तर देंहटाएं
  32. कमाल की क्षणिका और गहन भावाभिव्यक्ति ! बधाई एवं शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  33. साधना वैद्य जी,
    आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपका आभार...
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया....
    हार्दिक धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  34. मनमोहक प्रस्तुति - क्षणिका में गहन अर्थ समाहित हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  35. राकेश कौशिक जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  36. हाथ की लकीरों पर उंगली फिरा कर पढ़ ली गई जिंदगी की पूरी किताब.

    उत्तर देंहटाएं
  37. Aap ne jo bhav chand panktiyon me kah diye, ham shayad wah poori kitab likh kar bhi nahi prakat kar paate.Bahut hi accha laga mujhe...khoobsurat ehasaas....mujhe ek purani film ki kuch panktian yad aa gayi..."HAMNE DEKHI HAI IN AANKHON KI MAHAKTI KHUSHBU,HATH SE CHHOO KE ISE RISHTE KA ILZAM NA DO....SIRF EHSAAS HAIN YE DOOR SE MAHSOOS KARO,KHWAB KO KHWAB HI RAHNE DO KOYI NAAM NA DO."

    Mere angadhe udgaron ko sarahne ke liye shatshah dhanyavaad.

    उत्तर देंहटाएं
  38. आपकी कविता का स्पर्श बड़ा ही संवेदनशील है। आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  39. राहुल सिंह जी,
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।
    आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  40. विजय रंजन जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं।
    सम्वाद क़ायम रखें।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  41. परशुराम राय जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  42. सारा सच....,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद! आपका स्वागत है!
    आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  43. इसे पढकर एक शे’र याद आ गया,

    तमाम उम्र हथेलियों में सनसनाता है जब
    हाथ किसी का हाथ में आकर छूट जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  44. मनोज कुमार जी,
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।
    आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  45. विजय रंजन जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    आपका सदा स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  46. स्पर्श बहुत कुछ कह देता है, अपने ढंग से. काश सभी के पास इतनी संवेदना होती! बहुत सुन्दर रचना है आपकी . अक्षय बधाइयाँ

    उत्तर देंहटाएं
  47. समीर लाल जी,
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  48. अबनीश सिंह चौहान जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  49. ਡਾ. ਸ਼ਾਰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ,
    ਬਹੁਤ ਚੰਗਾ ਲੱਗਾ ਆਪ ਨੁੰ ਪੜ੍ਹ ਕੇ....ਹਰ ਲਫਜ਼ ਧੁਰ ਦਿਲ 'ਚ ਉਤਰਦਾ ਹੈ....ਕਵਿਤਾ ਦਾ ਅੱਖਰ-ਅੱਖਰ ਬੋਲਦਾ ਹੈ...
    ਵਾਹ ! ਵਾਹ !
    ਜਦੋਂ ਦਿਲੋਂ ਸਿਰਫ ਵਾਹ - ਵਾਹ ਨਿਕਲ਼ੇ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਓਹ ਇੱਕ ਉੱਚ ਕੋਟੀ ਦੀ ਰਚਨਾ ਹੈ।

    उत्तर देंहटाएं
  50. ਡਾ. ਹਰਦੀਪ ਕੌਰ ਸੰਧੂ ਜੀ,
    ਹੌਸਲਾ ਅਫਜਾਈ ਲਈ ਧੰਨਵਾਦ....
    ਸਾਡੇ ਬਲੋਗ ਵਿਚੋਂ ਦੇਖ ਕੇ ਚੰਗਾ ਲਾਗਿਯਾ....
    ਦਿਲੀ ਸ਼ੁਕ੍ਰਿਯਾ!

    उत्तर देंहटाएं
  51. नित्यानन्द जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  52. आदरणीय शरद जी,
    यथायोग्य अभिवादन् ।

    जी... बहुत मुश्किल है, आज के दौर में किसी की उंगली छूकर उसे पूरा का पूरा पढ़ लेना, उससे भी कहीं ज्यादा मुश्किल है किसी की उंगली छूकर उसे पूरा का पूरा पढ़ते हुये देख, उसको समझ पाना? छूने-पढऩे का इतना बेहतरीन शब्दांकन करने के लिये आपको धन्यवाद।

    रविकुमार सिंह

    उत्तर देंहटाएं
  53. बबुल जी,
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  54. बड़े कमाल के गणितज्ञ हैं वे जो ऊँगली छूनेमात्र से ही पूरा का पूरा समझ लेते हैं उनको . लेकिन डॉ. साहिब आपने कैसे जाना ?
    उनमें से किसने कहा आपको ? क्या आपको पूरा यकीन है ?यह मन बड़ा छलावा भी करता है .कभी कभी नहीं अक्सर धोखा हो जाता है समझने का. कमबख्त रोमांस है ही ऐसी बला.
    आपने मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा'पर आकर कर्तार्थ किया है मुझे .शब्दों का दान कुछ और मिलता तो और भी अच्छा लगता .बहुत बहुत धन्यवाद .

    उत्तर देंहटाएं
  55. कविता रावत जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  56. राकेश कुमार जी,
    आपके विचारों के लिए आभारी हूं....
    आपको हार्दिक धन्यवाद !
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।
    आपका ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' निश्चितरूप से रुचिकर है।

    उत्तर देंहटाएं
  57. धन्यवाद आपका . अभी मैं सीखने की प्रक्रिया से गुजर रहा हूं . आप जैसे परिपक्त लेखकों के बारे में राय देने में कुछ समय और चाहिए मुझे . आपकी टिप्पणियाँ मिली . नई ऊर्जा का सृजन महसूस करता हूं .
    आभार स्वीकारें .

    उत्तर देंहटाएं
  58. धन्यवाद नित्यानन्द जी!
    संवाद हमेशा नई ऊर्जा देता है...

    उत्तर देंहटाएं
  59. छू के निकल गयी हवा मुझसे और उसके शाहर का हाल मिल गया
    सुन्दर रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  60. सुनील कुमार जी,
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  61. छोटी सी कविता...पर प्रेम के हर कोमल भाव को अपने में समेटे हुई..........लाजवाब प्रस्तुति.....बधाई।

    आपने रचनाकार पर आकर मेरी कविता को पढ़ा और अपने विचारों से अवगत कराया। बहुत-बहुत आभार। आपकी प्रतिक्रियाओं की हमेशा प्रतिक्षा रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  62. क्या खूब अहसास रहा होगा...
    बहुत खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  63. मालिनी गौतम जी,
    अपने ब्लॉग पर आपको देख कर प्रसन्नता हुई...
    विचारों से अवगत कराने के लिए बहुत-बहुत आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  64. पूजा जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया...
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  65. कवि ने
    ख्वाब में
    एक मूर्ति गढ़ लिया
    उसने उसकी
    उँगलियोँ को छुआ
    और पूरा पढ़ लिया।
    ...आनंद आ गया यहाँ आकर।

    उत्तर देंहटाएं
  66. क्या बात है ... कुछ शब्दों में जीवन क मर्म लिख दिया .... बहुत खूब ..

    उत्तर देंहटाएं
  67. bahut hi khoobsoorat ehsaas. sach main aisa hota hai kisi ka sparsh apko ta-umr yaad rehta hai uske hone ka ehsaas karvata rehta hai. jaise vo aap main aur aap us main jazb ho chuke ho.

    bahut sundar

    accha laga apko parhna
    shukriya

    उत्तर देंहटाएं
  68. देवेन्द्र पाण्डेय जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया...हार्दिक धन्यवाद।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  69. दिगम्बर नासवा जी,
    आपके विचार सुखद लगे.... बहुत-बहुत आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  70. विजय मौद्गिल जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने....मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपका आभार...आपका स्वागत है।
    आपके विचारों के लिए आभारी हूं....
    इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  71. aapke blog par aana bahut santoshprad raha...bahut hi achchhe darje ka lekhan aur prastiti.

    उत्तर देंहटाएं
  72. अभिन्न जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिए बहुत-बहुत आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  73. राजेश चड्ढ़ा जी,
    विचारों से अवगत कराने के लिए बहुत-बहुत आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  74. बेमिसाल अभिव्यक्ति. जवाब नही इस संप्रेषणता का.

    रामराम

    उत्तर देंहटाएं
  75. Bhartendu Mishra ने Facebook पर टिप्पणी की|

    नमस्ते Sushri Sharad,
    Bhartendu Mishra ने लिखा शरद जी प्रेम ऐसा ही होता है। कितनी गहरी अनुभूति से छुआ होगा उसने उसकी अंगुलियो को यह सत्य शब्दो से परे है,और फिर पूरा का पूरा पढ लिया जाना तो कमाल है।व्यन्जना की यह शक्ति ..बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  76. भारतेन्दु मिश्र जी,
    अपने फेसबुक पर आपकी टिप्पणी पा कर प्रसन्नता हुई...
    विचारों से अवगत कराने के लिए बहुत-बहुत आभार।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  77. ताऊ रामपुरिया जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया...
    हार्दिक धन्यवाद।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें...

    उत्तर देंहटाएं
  78. वीरूभाई जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  79. ham aaj pahli baar apke blog per aaye... apki har rachna padi... apne bhut hi kam shabdo me bhut gahre bhaavo ko pratut kiya hai... jo bhut muskil hota hai... per apne kiya... bhut hi accha likhti hai aap... thank u very much ki apne hame itna accha padne ko diya hai...

    उत्तर देंहटाएं
  80. सुषमा आहुति जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरी कविता पसन्द आई....
    आभारी हूं।
    इसी तरह संवाद बनाए रखें....

    उत्तर देंहटाएं
  81. कोमल अहसासों से परिपूर्ण सुन्दर रचना|

    neelkamal.com

    उत्तर देंहटाएं
  82. नीलकमल जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं।
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  83. मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
    आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
    पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  84. इतने कम शब्दों में कितनी बड़ी बात कह दि आपने .. दिल से बधाई स्वीकार करे..

    आभार
    विजय
    -----------
    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

    उत्तर देंहटाएं
  85. लाजवाब
    पढने के लिए शब्दों और कथन की क्या जरूरत

    उत्तर देंहटाएं
  86. बस जो बात ग्रंथों में नहीं कही जा सकती थी ...एक स्पर्श में कह दी आपने.....

    उत्तर देंहटाएं