सोमवार, फ़रवरी 07, 2011

यही तो संकेत है वसंत का......


112 टिप्‍पणियां:

  1. बसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई हो

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुशान्त जैन जी, हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत-बहुत धन्यवाद प्रवीण पाण्डेय जी।

    उत्तर देंहटाएं
  4. रश्मि प्रभा जी, हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुशील बाकलीवाल जी, आभारी हूं...बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अमरजीत जी, मेरे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है! आपको भी बसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह ..बहुत ही सुन्‍दर भाव प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर संकेत बसंत का| धन्यवाद|
    बसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई|

    उत्तर देंहटाएं
  9. जानबूझ कर छोड़ा गया रुमाल ......बसंत का अच्छा संकेत , बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. संकेत बसंत का..बहुत सुन्दर .अच्छा लगा....

    उत्तर देंहटाएं
  11. नमस्कार..

    श्रीमती अल्पना वर्मा जी के ब्लॉग 'व्योम के पार" पर आपकी टिपण्णी ने आपके ब्लॉग तक का रास्ता दिखाया और पाया की एक अभूतपूर्व शख्सियत से रु-बा-रु हूँ...आपका हिंदी प्रेम, अभिव्यक्ति और छंदात्मक रचनाएँ, कम शब्दों मैं सारगर्भित सन्देश देती सी प्रतीत हुई हैं...

    निःसंदेह मनोभओवों को कविता के माध्यम से कितने बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है ये आपके ब्लॉग पर उल्लिखित कविताओं को पढ़कर कोई भी जान सकता है...

    आज से मैं आपके ब्लॉग का फोल्लोवेर हुआ...

    दीपक...

    उत्तर देंहटाएं
  12. नमस्कार..

    कितने ही संकेत छुपे हैं...
    प्रकृति जो लाये ऋतू वसंत...
    पीली सरसों संग नव कोपल...
    हर्षाती मन की उमंग...

    सुन्दर भाव, सुन्दर कविता...

    दीपक...

    उत्तर देंहटाएं
  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  14. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’जी,
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें। मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है! आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुनील कुमार जी, रचना को पसन्द किया आभारी हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  16. अमृता तन्मय जी, आभार एवं हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  17. दीपक शुक्ला जी,
    हार्दिक धन्यवाद!मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है! आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.आपकी काव्य पंक्तियां भी बहुत सुन्दर हैं। आभार एवं बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  18. दीपक सैनी जी, मेरी रचना को पसन्द करने हेतु आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  19. अमिताभ मीत जी, हार्दिक धन्यवाद! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  20. रुमाल........अद्भुत बासन्ती संकेत
    कम शब्दों की सुन्दर अभिव्यक्ति.
    ढेरों शुभ कामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  21. हार्दिक धन्यवाद sagebob! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  22. डॉ.शरद जी आपने अद्भुत और कभी न भूलने वाली पंक्तियाँ लिखी हैं |मैं अपना एक शेर आपको भेंट कर रहा हूँ |तुम्हारे हर हुनर के हो गए हम इस तरह कायल .हमें अपना भी अब कोई हुनर अच्छा नहीं लगता |

    उत्तर देंहटाएं
  23. बबन पाण्डेय जी,
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें। आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  24. जयकृष्ण राय तुषार जी,
    आपके अपनत्व ने मुझे भावविभोर कर दिया ..... इस उत्साहवर्द्धन के लिए आभारी हूं. आपको बहुत बहुत धन्यवाद ! सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  25. शरद जी
    सही कहा आपने।
    वसन्त का एक सटीक चित्र
    सरसों इसी समय फूलती है.............


    एक निवेदन-
    मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है।

    उत्तर देंहटाएं
  26. Nice post.
    यदि आप 'प्यारी मां' ब्लॉग के लेखिका मंडल की सम्मानित सदस्य बनना चाहती हैं तो कृपया अपनी ईमेल आई डी भेज दीजिये और फिर निमंत्रण को स्वीकार करके लिखना शुरू करें.
    यह एक अभियान है मां के गौरव की रक्षा का .
    मां बचाओ , मानवता बचाओ .
    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html

    उत्तर देंहटाएं
  27. पीली सरसों,पीली पुआल और छूटा रुमाल ... बसंत का पूरा एहसास कुछ शब्दों में !

    उत्तर देंहटाएं
  28. pili sarson ki yaad mujhe bhi aa hi gayi......aapne yaad dila diya delhi me rahte hue ise dekhe saalon ho gaye...ab gaanw bhaagna padega.......

    उत्तर देंहटाएं
  29. समीर लाल जी,
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  30. वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर ने कहा,
    हार्दिक धन्यवाद>
    पर्यावरण के प्रति आपका समर्पण सभी को प्रेरणा दे...यही कामना है।

    उत्तर देंहटाएं
  31. डॉ.अनवर जमाल जी़,
    आभार एवं हार्दिक धन्यवाद....

    उत्तर देंहटाएं
  32. मृदुला प्रधान जी,
    आपका आना सुखद लगा...धन्यवाद....

    उत्तर देंहटाएं
  33. अमित-निवेदिता जी,
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार....

    उत्तर देंहटाएं
  34. रजनीश तिवारी जी,
    हार्दिक धन्यवाद! सम्वाद क़ायम रखें। मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  35. केवल राम जी़,
    आपको बहुत बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  36. मार्क राय जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    गांव, खेत और प्राकृतिक सौंदर्य हमेशा नई ऊर्जा देते हैं...इसलिए ख़याल अच्छा है...गांव हो आइए।

    उत्तर देंहटाएं
  37. वसंत की बेला पर सुन्दर पोस्ट...बधाई.
    कभी 'पाखी की दुनिया' में भी तो आइये !!

    उत्तर देंहटाएं
  38. मानव मेहता जी,
    मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  39. प्रिय अक्षिता (पाखी),
    मेरे ब्लॉग पर फिर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद! इसी तरह मिलती रहना। मैं भी 'पाखी की दुनिया' में पहुंच रही हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  40. रवि राजभार जी,
    मेरे ब्लॉग पर फिर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह संवाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  41. मेरी प्रार्थना में

    हे प्रभु !मेरी प्रार्थना में
    गरीबों को अनदेखा करने वाली
    आँखों की पुतलियाँ फट जायें......
    घूंस लेने वाले हाथ
    कोहनी तक गल जायें...........
    असहायों की चीख न सुनने वाले
    कानो के परदे
    दिमाग तक सड़ जायें .......
    किसी मजबूर के सामने
    पत्थर के माफिक
    अपने में सक्षम -समर्थ
    साहब और सरकार का
    जो भ्रम पाल बैठे हैं
    उनकी औलादें मर जायें .......
    हे प्रभु ! मेरी प्रार्थना में
    तेरे विश्वास पर
    तुझसे न्याय की प्रतीक्षा में
    जो आज भी
    भूंखे-नंगे बैठे हैं
    तू उनके लिए जगह छोड़
    आब उन्हें भी मौका दे
    एक बार वे भी भगवान् बन जायें.........
    You create a nice poem Miss Sharad..thanks..
    Your most welcome to my blog http:/
    atulkushwaha-resources.blogspot.com
    atulkavitagajal.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  42. ममता त्रिपाठी जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद.
    सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  43. अतुल कुशवाहा जी,
    मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद! आपका स्वागत है।
    ‘मेरी प्रार्थना में ’ ....अच्छी कविता के लिये बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  44. jaan bujh kar chhoda gaya rumaal...:)
    iss ek vakya ne pure vaktavya me char chand laga diya..:D
    bahut khub!!
    kabhi hamare blog pe aayen..

    उत्तर देंहटाएं
  45. मुकेश कुमार सिन्हा जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार...
    आपको बहुत-बहुत धन्यवाद...
    सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  46. शरद मेम !
    नमस्कार !
    मज़ा आ गया ,आप कि ये खूब सूरत पंक्तिया पढ़ !
    साधुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  47. इतने कम शब्दों में पूरा का पूरा बसंत झूम कर बुला लिया !
    सच कहें तो यही कविता है !
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  48. कुंवर कुसुमेश जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  49. हर्ष जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपको धन्यवाद.
    सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  50. सुनील गज्जाणी जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है! आभारी हूं।
    आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  51. ज्ञानचंद मर्मज्ञ जी,
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  52. आदरणीय शरद जी,
    यथायोग्य अभिवादन् ।

    फागुन में यूं ही अचानक बसंत पढऩे को मिल गया, आपके ब्लॉग पर अच्छा लगा। सब कुछ वैसा ही है, हां अब आसानी रहेगी आपकी परछाईं के साथ चलने में, साथ ही आपके शब्दों की जमापूंजी को कागज पर खर्चने में भी अगर आपकी सहमति मिल जाये तो?

    धन्यवाद।


    रविकुमार बाबुल ,
    फीचर-सम्पादक
    बीपीएन टाइम्स
    ग्वालियर
    -----------------
    मोबाइल नंबर : 09302650741

    उत्तर देंहटाएं
  53. रविकुमार बाबुल जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा.सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  54. बहुत ही सुन्दर सन्देश! आपको भी बसंत की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  55. सुमित ‘सत्य’ जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  56. मनोज कुमार जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपको धन्यवाद...
    आपके विचारों का मेरे ब्लॉग्स पर सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  57. मिथिलेश दुबे जी,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपको धन्यवाद.
    सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  58. अरविन्द पाण्डेय जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद ...।
    आपके विचारों से मेरा उत्साह बढ़ेगा....सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  59. शिव शंकर जी,
    मेरे ब्लॉग से अनुसरण करने हार्दिक धन्यवाद! आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  60. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ जी,
    बहुत -बहुत ..शुक्रिया.

    उत्तर देंहटाएं
  61. आदरणीया डॉ.शरद जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    पीली सरसों
    पीला पुआल
    जान बूझ कर छोड़ा गया रूमाल


    अच्छे बिंब के साथ संक्षिप्त रचना के लिए बधाई !

    समय निकाल कर आने का प्रयास करें …
    ♥ प्यारो न्यारो ये बसंत है !♥
    बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  62. राजेन्द्र स्वर्णकार जी,
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद!

    बसंत ॠतु की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  63. पीली सरसों
    पीला पुआल
    जान बूझ कर छोड़ा गया रूमाल

    अत्यंत सुंदर बिंबों से चंद शब्दों मे बसंत का एहसास करा दिया इस रचना ने, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  64. परदेस की बेबसी को सुन्‍दरता से व्‍यक्‍त कि‍या है, और पंक्‍ि‍तयां गेय बन पड़ी हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  65. कृष्ण कयात जी,
    मेरे ब्लॉग से अनुसरण करने हार्दिक धन्यवाद!
    आपका स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  66. ताऊ रामपुरिया जी,
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  67. राजेय शा जी,
    मेरे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है!
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  68. गागर में सागर और "जान बूझकर छोड़ा गया रुमाल" अद्भुत

    उत्तर देंहटाएं
  69. राकेश कौशिक जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  70. कुशवंश जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    आपका स्वागत है!
    आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  71. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी . आपने बहुत बड़ा काम किया है साहित्य, समाज, एवं इतिहास के क्षेत्र में. आपकी जितनी भी तारीफ़ की जाय काम है. मेरी बधाई स्वीकारें. अवनीश सिंह चौहान

    उत्तर देंहटाएं
  72. अबनीश सिंह चौहान जी,
    मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    आपका स्वागत है!
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं।
    इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  73. Aadarniya Dr(miss)Sharad Singh ji
    "ये भी कोई बात हुई ,कुछ कही कुछ ना कही,
    आपने तो कर ही दिया है कमाल,
    एक रुमाल से ही कर दिया है सबको बेहाल."

    आपके ब्लॉग पर आकर बहुत प्रसन्नता मिली.
    आपकी विलक्षण प्रतिभा का मै कायल हूँ.
    आप मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा 'पर आये इसके
    लिए बहुत बहुत आभारी हूँ आपका.कृपया,अपने बहुमूल्य
    विचारों से मेरा मनोबल बढ़ाते रहें .

    उत्तर देंहटाएं
  74. दिनेशराय द्विवेदी जी,
    आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए आपका आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  75. राकेश कुमार जी,
    आपका स्वागत है!
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं।
    इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  76. जगदीश बाली जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।
    मेरे ब्लॉग पर आपका सदा स्वागत है!

    उत्तर देंहटाएं
  77. जानबूझ कर छोड़ा गया रुमाल ...
    बसंत का अच्छा संकेत , बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  78. अमरेन्द्र ‘अमर’ जी,
    मेरी रचना को पसन्द किया आभारी हूं। हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  79. आदरणीया डॉ.शरद जी
    नमस्कार !
    बसंत का पूरा एहसास कुछ शब्दों में !

    उत्तर देंहटाएं
  80. बसंत ॠतु की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं !
    कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
    माफ़ी चाहता हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  81. आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा सो आपका फालोवर बन रहा हूँ ! शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  82. बहुत बहुत बधाई सेंचुरी पूरी हो गई

    उत्तर देंहटाएं
  83. संजय भास्कर जी,
    शुभकामनाओं और प्रोत्साहन के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।
    आपका सदा स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  84. andaaj bahut khoobsurat hai bilkul basanti mausam ki hi tarah ,aabhari hoon aap aai .badhai .

    उत्तर देंहटाएं
  85. ज्योति सिंह जी,
    बहुत बहुत धन्यवाद...
    आपका सदा स्वागत है...
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  86. Sharad ji, itne km shabdon me itni baatein kaise kah jaati hain aap...vilakshan kala hai aur aap sachmuch kalam ki jaadugar...

    aandaze bayan aapka bahut pasand aaya...man ko bahut bhaaya...

    likhte rahiye...

    उत्तर देंहटाएं
  87. विजय रंजन जी,
    आपने मेरी कविता को पसन्द किया आभारी हूं।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
    ....सम्वाद क़ायम रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  88. बहुत खुब।शरद जी आप गागर में सागर भर देती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  89. डॉ शरद सिंह जी को नमस्कार !
    मेरे ख्याल से "पुआल " उत्तर भारत में धान(चावल ) के डंठलो को कहा जाता हूँ . पुआल शब्द का प्रयोग अनेक साहित्यकारों ने भी इसी सन्दर्भ में किया है , जैसे - .श्रद्धेय मुंशी प्रेमचंद जी ने अपनी कहानी "पूस की रात"
    कविता सुन्दर भाव लिए है !
    मैं भी सागर से हूँ, अगर हो सके तो आपसे मिलना चाहूँगा .
    ९०३९४३८७८१

    उत्तर देंहटाएं