शुक्रवार, दिसंबर 09, 2016

एक सार्थक संगोष्ठी संत कबीर के समाज-दर्शन पर .... A meaningful seminar on Sant Kabir

Dr (Miss) Sharad Singh
बीना कॉलेज द्वारा ग्राम हिरनछिपा में जनजागरूकता अभियान के तहत संत कबीर के समाज-दर्शन पर एक अत्यंत सार्थक संगोष्ठी कराई गई। जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए मैंने कहा कि संत कबीर के स्त्री-विषयक दोहों की पड़ताल करना आवश्यक है क्योंकि मुझे संदेह है कि स्त्री-विरोधी दोहे संत कबीर ने लिखे हैं। वे वाचिक परम्परा के कवि थे अतः यह संभव है कि उनके विरोधियों ने दुष्प्रचार के रूप में ऐसे दोहे उनके नाम के साथ प्रचारित कर दिए हों।
Under the public awareness campaign by the Bina College in the village Hirnchipa made a very meaningful seminar.As a special guest I said that it is necessary to examine the woman-related Dohe (couplets) of Sant Kabir. I doubt that the anti-woman Dohe not written by Sant Kabir. He was a poet of oral tradition, so it is possible that his opponents as propaganda may be disseminated such Dohe with his name.
Naidunia, Bina, 08.12.2016
Patrika, Bina edition, 08.12.2016
Dainik Bhaskar, Bina Edition, 08.12.2016
Bina Collage -Invitation Card, page-001
Bina Collage -Invitation Card, page-002

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