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27 March, 2018

मुझे तनहाइयां प्यारी ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

 मुझे तनहाइयां प्यारी
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मुझे तनहाइयां प्यारी
उसे रुसवाइयां प्यारी
यक़ीं मुझ पर करेगा क्या
उसे *अय्यारियां प्यारी
- डॉ शरद सिंह


*अय्यारियां=जासूसी

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किस्से - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

किस्से
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किताबों के पन्नों पे सोते हैं किस्से।
पढ़े कोई उनको क्या होते हैं किस्से।
भले हैं, बुरे हैं, वो जैसे भी हों, पर,

जीवन के अनुभव संजोते हैं किस्से।
- डॉ.शरद सिंह


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#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh

17 March, 2018

मुझे नहीं .. डॉ शरद सिंह



Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
मुझे नहीं
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रात अपनी मरमरी आवाज़ में
कुछ कहती है
एक नाम लेती रहती है
नाम?
श्श..श्श..श्श...

रात को छूट है
मुझे नहीं
नाम तुम्हारा लेने की...
- डॉ शरद सिंह

24 February, 2018

ज़िंदगी दिखती उदासी आजकल ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh


अपने ग़ज़ल संग्रह " पतझड़ में भीग रही लड़की " में प्रकाशित एक ग़ज़ल के कुछ शेर...
 
ज़िंदगी दिखती उदासी आजकल
आस्था लगती धुआं सी आजकल
कंदराएं अब भली लगाने लगीं
हो गया मन आदिवासी आजकल

निर्जला व्रत कह दिया हमने मगर
आत्मा तक है पियासी आजकल
- डॉ शरद सिंह


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#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh

19 February, 2018

एक इस्माइली है ख़त अब तो ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
खूब रफ़्तार में हैं सब अब तो
एक इस्माइली है ख़त अब तो
इश्क़  गोया है एक पैकेज-सा
साथ होता है ब्रेक’अप अब तो
- डॉ शरद सिंह


17 February, 2018

रात एक प्रतीक्षा ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
रात एक प्रतीक्षा
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किसी सूने स्टेशन के
प्लेटफार्म में बैठे हुए
प्रतीक्षा करना
विलम्ब से चल रही ट्रेन का
या फिर जाड़े की लम्बी रात में
स्वेटर के फंदों-सा
यादों को बुनना
और दे लेना खुद को तसल्ली
कि रात एक प्रतीक्षा ही तो है
नींद से जागने वाली सुबह की
और ट्रेन लेट ही सही, पर आएगी ही!
रूठना भूल कर लौटे हुए प्रिय की तरह ...

- डॉ शरद सिंह

15 February, 2018

उसकी यादों के मकां में ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
उसकी  यादों के  मकां में  है   बसेरा अब तो
कुछ तो ऐसा हो कि हो जाए वो मेरा अब तो
- डॉ शरद सिंह


30 January, 2018

कठिन लगता है ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

किसी को छोड़ कर आना
किसी से भी न जुड़ पाना
कठिन लगता है अकसर
इस तरह का दौर सह पाना
- डॉ शरद सिंह


25 January, 2018

वज़ह बताना मुश्क़िल है ...... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
चार क़िताबें पढ़ कर दुनिया को पढ़ पाना मुश्क़िल है।
हर अनजाने को आगे बढ़, गले लगाना मुश्क़िल है।
सबको रुतबे से मतलब है, मतलब है पोजीशन से
ऐसे लोगों से, या रब्बा! साथ निभाना मुश्क़िल है।
शाम ढली तो मेरी आंखों से आंसू की धार बही
अच्छा है, कोई न पूछे, वज़ह बताना
मुश्क़िल है।
- डॉ. शरद सिंह
(‘मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘‘पतझड़ में भीग रही लड़की’’ से)

22 January, 2018

वसंत एक फूल ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं !
Happy Vasant Panchami !!!

वसंत एक फूल
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गुज़रते वसंतों से
एक वसंत चुन कर
टांक लिया है मैंने
यादों के लहराते
बालों में फूल की तरह
अब हर वसंत में
खिल उठता है
वही फूल
*प्लेटोनिक प्रेम की तरह।
- डॉ. शरद सिंह


21 January, 2018

ज़िन्दगी उसी समय... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
ज़िन्दगी उसी समय...
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ख़यालों के प्याले से
यादों की
कुछ मीठी चुस्कियां
ठीक वैसे ही
जैसे कोई देखे मुड़ कर देखे
और करे महसूस
किसी के पदचाप
किसी की उपस्थिति
किसी का अपनापन
और साथ चलने की ललक
ज़िन्दगी उसी समय
भर उठती है गर्मजोशी से
अचानक ... अनायास ...।
- डॉ. शरद सिंह

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20 December, 2017

उड़ना चाहती हूं ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
उड़ना चाहती हूं 
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उड़ना चाहती हूं 
पंछी की तरह 
ख़्वाबों के पंख लगा कर 
उन्मुक्त आकाश में, 
लाना चाहती हूं 
ऐसी धूप 
ऐसी हवा 
ऐसी बारिश 
ऐसा चांद 
ऐसे तारे 
ऐसा सूरज 
जो बदल दे क़िस्मत 
सिसकती औरतों की 
और वे भी भरे परवाज़ 
खुले आकाश में 
खुशियां बन कर।
- डॉ शरद सिंह
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18 December, 2017

मैंने जो मांगा ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

मैंने जो मांगा
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जाड़े की रात ने
सूरज से मांगी 
एक सुबह
घर की दीवारों ने
मांगी अलावों से
गरमाहट
मैंने जो मांगा
अपनेपन में डूबी
इक आहट
तब से वो
मौन ओढ़ बैठा है
मैंने क्या उससे
कुछ ज़्यादा मांग लिया?

- डॉ शरद सिंह

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10 August, 2016

‘पत्रिका’ समाचार पत्र टाॅक शो ... जेंडर इक्वीलिटी .... डाॅ. शरद सिंह

‘पत्रिका’ समाचार पत्र द्वारा एक महत्वपूर्ण ‘टाॅक शो’ आयोजित किया गया जिसमें मैंने और मेरी दीदी डाॅ.
वर्षा सिंह ने भी अपने विचार रखे। मुद्दा था ‘‘जेंडर इक्वीलिटी’’....
ऐसे संवेदनशील और जरूरी मुद्दे पर ‘टाॅक शो’ के लिए धन्यवाद ‘‘पत्रिका’!
(10 जुलाई 2016) ...

 http://epaper.patrika.com/c/12387420

Patrika - Talk Show - 10.08.2016 - Sharad Singh
Patrika - Talk Show - 10.08.2016 - Sharad Singh
 
Patrika - Talk Show - 10.08.2016 - Sharad Singh