16 January, 2026

कविता | भ्रम | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

भ्रम
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

भ्रम 
एक धोखा ही तो है
किसी के कारण
ख़ुद के लिए
बुना गया ख़्वाब
भ्रम टूटने पर
टूटता है ख़्वाब
एक कांच की तरह
और किरचें कर जाती हैं
लहूलुहान
आत्मा को
विश्वास को
इंसानियत को,
फिर भी,
भ्रम के जाल में फंसने से
खुद को 
नहीं बचा पाता है 
खास कर वो
जो होता है
नितांत अकेला
इस दुनिया में।
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कविता | भ्रम | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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12 January, 2026

चूल्हा | कविता | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

भूख, गरीबी का किस्सा है, छै ईंटों का चूल्हा।
बेघर जीवन का हिस्सा है, छै ईंटों का चूल्हा।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

Photo by #DrMissSharadSingh 

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21 December, 2025

शायरी | रात के साए में | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

 उदास दिन का हर एक पल बड़ा कठिन गुज़रा 
न जाने   रात के   साए में   क्या    घुटन  होगी।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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17 December, 2025

शायरी | रिश्तों की तासीर | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अर्ज़ है
पत्ते पीले हो कर, सब्ज़ नहीं होते 
इनसे समझो रिश्तों की तासीर कभी
-डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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10 December, 2025

शायरी | अलाव | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

वो जो फुटपाथ पे  रातों को  ठिठुरते हैं पहर
उनके आगे कोई रख जाए अलावों का सहर
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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05 December, 2025

कविता | कॉफी पर चांद | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता 

कॉफी पर चांद
    - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

आज रात 
चांद ने
बजाई 
मेरे घर की कॉलबेल
कड़ाके की ठंड में
दरकार थी उसे
एक कप कॉफी की
अधकटे नीम की 
शाख पर बैठ कर
पीना चाहता था 
सफ़ेद मग में

एक ख़ामोशी तैरती रही
धरती से आकाश तक
चर्चा होती है चाय पर
कॉफी पर नहीं
सिर्फ़ उठता रहा धुआं
हमारे मग से
जैसे हैशटैग हो 
कोहरे का।
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Photo by Dr (Ms) Sharad Singh

13 November, 2025

कविता | अन्न के पास बैठी कविता | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता 
अन्न के पास बैठी कविता
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अन्न के पास बैठी 
कविता
सुनती है
भूख की ध्वनियां,
महसूस करती है
खाली पेट वाली
आंतों की कुलबुलाहटें,
मुट्ठी भर दानों की इच्छाएं,
अचरज होता है उसे
काग़ज़ के नोटों की शक्ति पर
वे नहीं 
तो
सामने रखा अन्न
हो कर भी नहीं

अन्न, भूख और रोटी का
समीकरण
रखता है आबाद
देह का बाज़ार,
इंसानों की मंडी,
कर्ज का बोझा
और
लाचारी का सबक

उस कविता को
बहुत कुछ
देखना, सुनना
और समझना है अभी।
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