Showing posts with label रूह तन्हा है. Show all posts
Showing posts with label रूह तन्हा है. Show all posts

14 July, 2021

ग़ज़ल | रूह तन्हा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ग़ज़ल
रूह तन्हा है ...
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

रूह तन्हा है, ज़ख़्म गहरा है
ग़म सरे-शाम आ के ठहरा है

याद आती हैं उड़ाने लेकिन
आसमानों पे आज पहरा है

खो गया चैन, सुकूं भी ग़ायब
कल समंदर था, आज सहरा है

और सुनवाई अब नहीं होगी
टूटे दिल का निज़ाम बहरा है

अब दिखेगा न मेरी आंखों को
फिर भी आंखों में एक चहरा है
          -------------