Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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14 July, 2021
ग़ज़ल | रूह तन्हा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ग़ज़ल रूह तन्हा है ... - डॉ (सुश्री) शरद सिंह रूह तन्हा है, ज़ख़्म गहरा है ग़म सरे-शाम आ के ठहरा है याद आती हैं उड़ाने लेकिन आसमानों प...
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