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08 July, 2026

थिगड़े वाली चूनरी | दोहा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

थिगड़े  वाली  चूनरी, ओढ़े  बैठी  हीर।
फटे दुशाले में बंधी,  रांझे की तक़दीर।।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह 
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21 January, 2023

दोहा | दूरी दसियों मील | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

एक दोहा...
तेरे   मेरे    बीच    की, दूरी दसियों मील।
फिर भी किरणें हैं यहां, जले वहां कंदील।।

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दोहा | रांझे की तक़दीर | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

एक दोहा...
थिगड़े  वाली  चूनरी, ओढ़े  बैठी  हीर।
फटे दुशाले में बंधी,  रांझे की तक़दीर।।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

#थिगड़े #चूनरी #हीर #दुशाला #रांझा #तक़दीर #दोहा #डॉसुश्रीशरदसिंह
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#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh

29 January, 2020

वासंती दोहे - डॉ शरद सिंह

Basanti Dohe of Dr (Miss) Sharad Singh

वासंती दोहे 
- डॉ शरद सिंह

सपने वासंती हुए, रंगों से भरपूर। 
ऐसे में कोई रहे, क्यों अपनों से दूर।। 

खेतों में सरसों खिले, जंगल खिले पलाश ।
खजुराहो की भांति ऋतु, किसने दिया तराश ।।

दुख के दड़बे से निकल, सुख के दो पग नाप ।
पहले से दूना लगे, खुद को अपना आप ।।

तोता मैना कर रहे 'ऋतुसंहारम्' याद ।
 मौसम ने जो कर दिया, पोर-पोर अनुवाद ।।

उसी राह मिलने लगे महके हुए बबूल।
जिस पर चलने से चुभे, विगत वर्ष में शूल।।

कागज कलम दवात का आज नहीं कुछ काम ।
संकेतों से व्यक्त है मन की चाहत तमाम ।।

आशाओं की देहरी जाग रही है आज ।
आहट गुजरी थी अभी देकर इक आवाज़ ।।

बसंती दोहे 'शरद' खोलें दिल के राज़। 
अपनापन मिलता रहे, चलते रहें रिवाज़।।