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| Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh |
(मेरे ग़ज़ल संग्रह 'पतझर में भीग रही लड़की’ से )
पतझड़ में भीग रही लड़की।
मौसम को जीत रही लड़की।
रहते दिन कभी नहीं एक से
अनुभव से सीख रही लड़की।
शिखरों तक जा पहुंची आज तो
कल तक जो दीन रही लड़की।
पढ़ती है धूप की क़िताबें
रातों की मीत रही लड़की।
मुट्ठी में होगी कल दुनिया
सपनों को बीन रही लड़की।
मांगे से मिले कब उजाले
अपना हक़ छीन रही लड़की।
चाहत का द्वार ‘शरद’, देख लो
आशा से लीप रही लड़की।
- डॉ शरद सिंह
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