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23 November, 2020

जाड़ों की रात में | कविता | डॉ शरद सिंह

जाड़ों की रात में ...
          - डॉ शरद सिंह

जाड़ों की रात में
लिहाफ़ में दुबके
किसी यादों से गरमाए सपने
नहीं चाहते हैं जागना
इसीलिए तो रातें
लम्बी हो जाती हैं 
जाड़ों में।
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