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28 December, 2020

चिड़िया तरसे दाने-दाने | आंसू बूंद चुए | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | नवगीत संग्रह

Dr (Miss) Sharad Singh

चिड़िया तरसे दाने-दाने

   - डाॅ (सुश्री) शरद सिंह


खुले पंख की बंद उड़ाने

    चिड़िया तरसे दाने-दाने।


इकलौते

सूरज से झाकें

मुट्ठी भर

किरणों के तिनके

शहरों की

परिपाटी बूझो

तुम किनके, हम किनके?


रिश्तों के हैं रिक्त खज़ाने

   तिल-तिल टूटे नेह सयाने।



सपनीलीं 

आखों की दुनिया

पलछिन

सपन सहेजे

मौसम ने

जैसे रख डाले

तेज़ धूप में खुले बरेजे


हर चेहरे बेबस, बेगाने

   मनवा गए दुखी तराने।

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(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)

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Dr (Miss) Sharad Singh, Navgeet, By Ansoo Boond Chuye - Navgeet Sangrah