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| Dr (Miss) Sharad Singh |
चिड़िया तरसे दाने-दाने
- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह
खुले पंख की बंद उड़ाने
चिड़िया तरसे दाने-दाने।
इकलौते
सूरज से झाकें
मुट्ठी भर
किरणों के तिनके
शहरों की
परिपाटी बूझो
तुम किनके, हम किनके?
रिश्तों के हैं रिक्त खज़ाने
तिल-तिल टूटे नेह सयाने।
सपनीलीं
आखों की दुनिया
पलछिन
सपन सहेजे
मौसम ने
जैसे रख डाले
तेज़ धूप में खुले बरेजे
हर चेहरे बेबस, बेगाने
मनवा गए दुखी तराने।
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(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)
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