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01 December, 2020

इक अलाव जलने दो | कविता | डाॅ शरद सिंह

Jade Ki Raat - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

इक अलाव जलने दो

- डाॅ शरद सिंह

जाड़े की रात 

ठिठुराते

बड़े पहर

चलने दो, 

जीवन में 

गरमाहट लाने को

यादों का 

इक अलाव जलने दो।

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24 November, 2017

इक अलाव जलने दो ... डॉ शरद सिंह


Winter ... Poetry of Dr Miss Sharad Singh
जाड़े को समर्पित मेरी एक कविता ....
इक अलाव जलने दो
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जाड़े की रात
ठिठुराते 
बड़े पहर 
चलने दो
जीवन में
गरमाहट
लाने को
यादों का
इक अलाव
जलने दो !
- डॉ शरद सिंह

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