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| Dr (Miss) Sharad Singh |
आंख भर आई
- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह
किसी की याद आई
आंख भर आई।
सुलगती रात
बुझते दिन
छुपा बैठा हुआ बगुला
पांखों से गिने पलछिन
घनी झरबेरियों-सी
राह दुखदाई।
उमगती चाह
सूना दिल
किसी का नाम पोखर में
लहरियों-सा करे झिलमिल
शिराओं में उतरती
शाम अकुलाई।
सरकती धूप
कतराए
अकेले-से खड़े घर में
कभी भी नींद न आए
अंधेरों में सिमटती
नींम अंगनाई।
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(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)

