24 August, 2023

प्लीज़ | कविता | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

असंख्य तारे हैं आसमान में
कैसे पहचानूं तुम्हें?
अब करने लगा है व्याकुल
धरती पर बेगानापन
एक संकेत दे दो
टिमटिमा दो
प्लीज़ ...😢
   - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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19 August, 2023

शायरी | नींद के गांव में | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

रतजगा  हो  गया  नींद के गांव में
याद अंगार बन कर  दहकती रही
नीम ख़ामोश गलियां रही देखतीं
एक परछाई  यूं  ही भटकती रही
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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17 August, 2023

शायरी | मोहब्बत में | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मोहब्बत में शरारत का मज़ा कुछ और होता है।
कहा इक ने तो दूजे ने सुना कुछ और होता है।
यही तो लुत्फ़ है ख़ामोश रह  कर  देखने  में  सब,
कि,दुनिया और कुछ समझे, हुआ  कुछ  और  होता है।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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12 August, 2023

कविता | सहेली | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

सहेली
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
एक शाम
मेरे बाजू में
बैठी थी अभी
रात आते ही
चली गई
छोड़ कर
और उतर आई
खूंटी पर टंगी उदासी
सगी सहेली की तरह
साथ देती है
रोज ही।
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06 August, 2023

शायरी | मंज़िल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

हम तो  बहता  पानी ठहरे
अपनी  राह  बना  ही लेंगे।
बाधाएं तुम खड़ी करो, पर
हम तो मंज़िल तक पहुंचेंगे।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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27 July, 2023

शायरी | वो न आए तो | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

वो न आए तो ये उसकी मर्ज़ी
हम तो ख़्वाबों में उसे पाते हैं।
है गिला और ना शिकवा कोई
अपनी  तनहाई  जिए जाते हैं।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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21 July, 2023

शायरी | इंसा बिकते हैं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह


अर्ज़ है -
चौपड़ बिछी हुई है, पासे फिंकते हैं।
राजनीति के हाथों,  इंसा बिकते हैं।
चीरहरण पर धर्मराज की ख़ामोशी
नग्न देह पर भी,स्वारथ ही दिखते हैं।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
 
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