Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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18 July, 2026
कविता | रात के इस दूसरे पहर में | डॉ सुश्री शरद सिंह
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कविता रात के इस दूसरे पहर में - डॉ सुश्री शरद सिंह रात के इस दूसरे पहर में अभी-अभी टूटी है नींद पसीने से भीगी देह धड़कनों क...
2 comments:
08 July, 2026
थिगड़े वाली चूनरी | दोहा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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थिगड़े वाली चूनरी, ओढ़े बैठी हीर। फटे दुशाले में बंधी, रांझे की तक़दीर।। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #दोहा #doha #डॉसुश्रीशरदसिंह
17 June, 2026
वो पर तौल रहा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी
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वो पर तौल रहा है आकाश में उड़ने के लिए। किसी और, किसी और, किसी और से जुड़ने के लिए। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #शायरी #ग़ज़ल #डॉसुश्...
16 June, 2026
कविता | वे बूझ लेते हैं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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कविता वे बूझ लेते हैं - डॉ (सुश्री) शरद सिंह शब्द टूटते हैं छूटते हैं रूठते हैं फिर मान जाते हैं, क्योंकि वे बूझ ले...
13 June, 2026
जरूरी तो नहीं - डॉ सुश्री शरद सिंह | शायरी
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हमख़्याली भी तो इक शय है इसी दुनिया की, हो मुहब्बत ही फ़क़त काम ज़रूरी तो नहीं। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #शायरी #ग़ज़ल #डॉसुश्...
10 June, 2026
जीना मुश्किल - डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी
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अब तो दिल की तनहाई को हुआ जा रहा जीना मुश्किल। फटी ज़िन्दगी के टुकड़ों को रेशा- रेशा सीना मुश्किल। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #शायर...
02 June, 2026
ज़रूरी तो नहीं | डॉ सुश्री शरद सिंह | शायरी
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हरेक रिश्ते का हो नाम ज़रूरी तो नहीं। हो मुहब्बत ही फ़क़त काम,ज़रूरी तो नहीं। अश्क़ लबरेज़ पियाला है मेरे हाथों में हो शरा...
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