Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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12 July, 2023
कविता | छीलन | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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छीलन - डॉ (सुश्री) शरद सिंह पेंसिल की छीलन से बनाया करती थी सुंदर-सुंदर फूल पर अब क्या करूं अपने मन की छीलन का ? ---------...
09 July, 2023
कविता | नमक | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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नमक - डॉ (सुश्री) शरद सिंह मेरे हाथों में थी एक सादी रोटी पर पहले कौर में ही मैंने जाना कितना नमक है मेरे आंसुओं में। -----...
05 July, 2023
कविता | पर हुआ है यही | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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पर हुआ है यही - डॉ (सुश्री) शरद सिंह चौंकाती हैं कुछ यादें ओह! कभी ऐसा भी हुआ था? देखा था टूटते तारे को लेट कर खु...
30 June, 2023
कविता | प्रेम-मंत्रों से नहा कर | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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प्रेम-मंत्रों से नहा कर - डॉ (सुश्री) शरद सिंह पढ़ लेते हो तुम मेरी जिस कविता को देर रात गए अपनी व्यस्तताओं के बीच पवित्र हो...
2 comments:
29 June, 2023
कविता | किसी एक चेहरे के लिए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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कविता किसी एक चेहरे के लिए - डॉ (सुश्री) शरद सिंह बहुत जीवंत होता है प्रेम तभी तो हंसते हैं, मुस्कुराते हैं गाते है...
27 June, 2023
शायरी | शहर की आग | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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अर्ज़ है - जिस्म की आंच को,आंखों से हवा देते हैं। शहर की आग पे आंखें ही मूंद लेते हैं। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #शायरी #ग़ज़ल...
24 June, 2023
शायरी | चलने देता | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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अर्ज़ है - चंद लम्हे को सम्हलने देता। दो क़दम साथ तो चलने देता। स्याह मावस में चांद खिल उठता ख़्वाब से ख़्वाब बदलने द...
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