Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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31 October, 2022
ग़ज़ल | ठंड | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ठंड खिल रही धीरे-धीरे। धूप ढल रही धीरे-धीरे। दिन तेजी से दौड़ लगाता रात चल रही धीरे-धीरे। कोट, पुलोवर, स्वेटर वाली सुबह...
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28 October, 2022
ग़ज़ल | शायरी | ये भी कोई जीना है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ग़ज़ल / शायरी दिल पर पत्थर रख कर जीना, ये भी कोई जीना है? कोई मुझे बताये आख़िर कितने आंसू पीना है? - डॉ (सुश्री) शरद...
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09 October, 2022
मुक्तक | पूनम का चांद | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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अमृत वर्षा कर रहा है, पूनम का चांद। मन को हर्षित कर रहा है, पूनम का चांद। शारदीय इस रात्रि की हुई कालिमा दूर जग को जगम...
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08 October, 2022
कविता | वज़ूद | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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वज़ूद - डॉ (सुश्री) शरद सिंह सफ़र में हूं कि है कांधे पे याद का कांवर पता नहीं पहुंचूंगी कहां काशी या मगहर ढूंढना बाद मेरे लिक्ख...
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01 October, 2022
कविता | प्रेम करूंगी यक़ीनन | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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कविता प्रेम करूंगी यक़ीनन - डॉ (सुश्री) शरद सिंह तुम कहते हो मैं प्रेम करूं चिड़ियों सी चहकूं नदी सी खिलखिलाऊं थाम कर हाथ निकल ...
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30 September, 2022
कविता | धूप बारिश के बाद की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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धूप बारिश के बाद की - डॉ (सुश्री) शरद सिंह कुछ अधिक गरमाने लगी है धूप बारिश के बाद की नमी, उमस और उष्णता से भरी धूप ...
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24 September, 2022
रात | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | कविता
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रात - डॉ (सुश्री) शरद सिंह रात आ गई है मेरे कांधे पर सिर रख कर सोने , जानती है मुझे तो है जागना ताज़िन्दगी गिनते हुए पहर के पहा...
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