Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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11 March, 2023
कविता | सफ़ेद गुलाब | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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सफ़ेद गुलाब - डॉ (सुश्री) शरद सिंह तुमसे बहुत बातें करती हूं मैं लगभग रोज़ ही फोन पर... नहीं! मिल कर... नहीं ! फिर? नेट, चैट... ...
10 March, 2023
कविता | सलवटों वाले दिन | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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सलवटों वाले दिन - डॉ (सुश्री) शरद सिंह मसल कर फेंके गए काग़ज़ की तरह तुड़े-मुड़े सलवटों वाले दिन नहीं होते किसी भी तरह सीधे क...
03 March, 2023
कविता | ख़ामोशी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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कविता | ख़ामोशी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह ज़िंदगी बेजुबान होती है लफ़्ज़ और आवाज़ तो उसे हम देते हैं और फिर ढूंढते हैं एक ख़ामोशी। ...
01 March, 2023
ग़ज़ल | सोचा ना था | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ग़ज़ल सोचा ना था - डॉ (सुश्री) शरद सिंह इश्क़ का धोखा सिर माथे पे ले कर जीते रहे हमेशा मौत भी धोखा दे जायेगी ये तो हमने सोचा ना...
2 comments:
21 February, 2023
ग़ज़ल | लिख देना | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ग़ज़ल लिख देना - डॉ (सुश्री) शरद सिंह हमने अपना आज लिखा है, तुम अपना कल लिख देना। इक बंजर के नाम, ओ साथी! हरियल जंगल लिख देना। ह...
1 comment:
20 February, 2023
ग़ज़ल | कट रहे हैं दिन | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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ग़ज़ल कट रहे हैं दिन - डॉ (सुश्री) शरद सिंह कट रहे हैं दिन सुपारी की तरह। ज़िन्दगी भारी, उधारी की तरह। चैन के पल हो गए हैं भू...
06 February, 2023
शायरी | शिकवा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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अर्ज़ है - क्या भला शिकवा-गिला इस ज़िंदगी से हो जब ज़िंदगी में ज़िंदगी-सा कुछ नहीं रहा। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह #शायरी #ग़ज़ल #डॉसुश्...
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