Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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31 May, 2021
ध्वनियां | कविता | डॉ शरद सिंह
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ध्वनियां - डॉ.शरदसिंह मुझे सुनना है- एन. राजम का वायलिन हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी शिवकुमार शर्मा का संतूर बीथोवन की सिम्...
30 May, 2021
एक आवाज़ | कविता | डॉ शरद सिंह
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एक आवाज़ - डॉ शरद सिंह भरी दोपहर में बादल छाए आज गरजे भी, बरसे भी छा गया अंधेरा कमरे के एक कोने में सिकुड़ कर बैठी मैं करत...
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जो बचे हुए हैं | कविता | डॉ शरद सिंह | नवभारत में प्रकाशित
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मेरी कविता "जो बचे हुए हैं" को आज 30.05.2021 को "नवभारत" के रविवारीय अंक में प्रकाशित किया गया है.... हार्दिक आभार ...
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29 May, 2021
सीने में समुद्र | कविता | डॉ शरद सिंह
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सीने में समुद्र - डॉ. शरद सिंह एक समुद्र दुख का हहराता रहता है सीने में टकराती हैं लहरें तट से फिर चली आती हैं रेत पर...
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28 May, 2021
क़लम की नोंक पर ठहरी कविता | कविता | डॉ शरद सिंह
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क़लम की नोंक पर ठहरी कविता - डॉ शरद सिंह मेरी क़लम की नोंक पर ठहरी हुई एक कविता आतुर है काग़ज़ पर उतरने को इस...
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27 May, 2021
सपने | कविता | डॉ शरद सिंह
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सपने - डॉ शरद सिंह कुछ आम से सपने कुछ नीम से सपने कुछ पंछी के अधखाए अमरूद से सपने कुछ गिलहरी के कुतरे सपने कुछ ज़मीन पर उतर...
बचे रह जाना | कविता | डॉ शरद सिंह
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बचे रह जाना - डॉ शरद सिंह पतझड़ ने कर दिया पेड़ को ठूंठ कुछ भी न बचा जीवन का चिन्ह सिवाय एक पत्ते के जो फड़फड़ा रहा है त...
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