पृष्ठ

03 March, 2024

शायरी | रिश्ते | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

इक भीड़ है दुनिया की,ये जान अकेली है।
रिश्ते हैं  अबूझे -  से,  हर सांस  पहेली है।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

#शायरी #ग़ज़ल #डॉसुश्रीशरदसिंह 
#DrMissSharadSingh #shayariofdrmisssharadsingh 
#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #भीड़ #दुनिया #जान #अकेली #रिश्ते #अबूझ #सांस #पहेली

No comments:

Post a Comment