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22 October, 2020

स्त्रीपाठ - 4 | वह स्त्री है | डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह | कविता

 

Vah Stri - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

स्त्रीपाठ - 4


वह स्त्री है

- डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह


वह 

ऊष्मा है

ऊर्जा है

उमंग है

उत्साह है


वह 

लय है

लोरी है

तरंग है

त्वरित है


वह

साकार है

सहज है

प्रकृति है

पृथ्वी है


क्योंकि वह स्त्री है।

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5 comments:

  1. नपे-तुले शब्दों में गहन तथ्य का निरूपण किया है शरद जी आपने । गागर में सागर जैसी इस कविता के लिए अभिनंदन आपका ।

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  2. हार्दिक आभार जितेन्द्र माथुर जी !!!

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 23 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. स्त्री पाठ 1 से 5 तक का शामिल की हूँ नारी विमर्श में एक पत्रिका के लिए

    हार्दिक आभार के संग

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