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06 January, 2021

आंख भर आई | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | आंसू बूंद चुए | नवगीत संग्रह

Dr (Miss) Sharad Singh
नवगीत


आंख भर आई


   - डाॅ (सुश्री) शरद सिंह



किसी की याद आई

आंख भर आई।


सुलगती रात

बुझते दिन

छुपा बैठा हुआ बगुला

पांखों से गिने पलछिन


घनी झरबेरियों-सी

राह दुखदाई।


उमगती चाह

सूना दिल

किसी का नाम पोखर में

लहरियों-सा करे झिलमिल


शिराओं में उतरती

शाम अकुलाई।


सरकती धूप

कतराए

अकेले-से खड़े घर में

कभी भी नींद न आए


अंधेरों में सिमटती

नींम अंगनाई।

     --------


(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)


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Dr (Miss) Sharad Singh, Navgeet, By Ansoo Boond Chuye - Navgeet Sangrah




5 comments:

  1. मीना भारद्वाज जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे नवगीत को चर्चा मंच में शामिल किया है।
    सुखद अनुभूति 🌷
    हार्दिक धन्यवाद 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

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  2. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद यशवन्त माथुर जी 🌹🙏🌹

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  3. अति सुन्दर । शुभकामनाएँ ।

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    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद अमृता जी !!!

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