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29 April, 2017

उदास रहने की आदत मुझे न हो जाए ...- डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
 
खुशी का एक भी लम्हा कहीं न खो जाए
उदास रहने की आदत मुझे न हो जाए
बला की धूप है ख़्वाबों में तो नहीं शिक़वा
ये ग़म की छांह कहीं और जा के सो जाए ... - डॉ शरद सिंह


#Shayari #SharadSingh
#धूप #ख़्वाबों #शिक़वा #लम्हा #उदास #खुशी #आदत

25 April, 2017

जो नहीं है वही लुभाएगा ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

एक तारा था छुप गया है कहीं
रात होने पे नज़र आएगा
ज़िन्दगी में है ये अनूठापन
जो नहीं है वही लुभाएगा ... - डॉ शरद सिंह


24 April, 2017

ज़िन्दगी भी अज़ब पहेली है ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
सांस दुश्मन है या सहेली है
ज़िन्दगी भी अज़ब पहेली है।
मौत आती है साथ पाने को
यूं तो रहती सदा अकेली है। - डॉ शरद सिंह


22 April, 2017

20 April, 2017

तप रहे हैं दिन ...- डॉ शरद सिंह

Dr (Ms) Sharad Singh

धूप का मिजाज़ कुछ ज़्यादा गर्म है ...इसी बात पर ये पंक्तियां...
 


 तप रहे हैं दिन अलावों की तरह
ज़िन्दगी लगती सवालों की तरह
टीसते हैं रोज़ मन में प्रश्न कुछ
पांव में चुभते-से छालों की तरह
- डॉ शरद सिंह

#Shayari #SharadSingh

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

यादों का पहरा है ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
खुशियों के  दरवाज़े   यादों का पहरा है
मुस्काना मुश्क़िल है   दर्द बहुत गहरा है
कहते हैं लोग सभी ग़म भी मिट जाते हैं
मुमकिन ये कैसे हो   वक़्त लगे ठहरा है
- डॉ शरद सिंह


06 April, 2017

पतझड़ में भीग रही लड़की ....

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

(मेरे ग़ज़ल संग्रह 'पतझर में भीग रही लड़की’ से )
पतझड़  में  भीग रही लड़की।
मौसम  को  जीत रही लड़की।

रहते दिन  कभी  नहीं एक से
अनुभव  से  सीख रही लड़की।

शिखरों तक जा पहुंची आज तो
कल तक जो  दीन रही लड़की।

पढ़ती  है  धूप  की   क़िताबें
रातों  की  मीत  रही  लड़की।

मुट्ठी  में  होगी  कल दुनिया
सपनों  को  बीन  रही लड़की।

मांगे  से   मिले  कब  उजाले
अपना  हक़  छीन  रही लड़की।

चाहत का  द्वार ‘शरद’, देख लो
आशा  से  लीप   रही लड़की।

   - डॉ शरद सिंह
 
#Shayari #SharadSingh

03 April, 2017

ऐसा लगता है ...

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

सूखी पत्ती  पैरों में दब  कुछ न कुछ तो  बोलेगी
दबी ज़िन्दगी का  हर पहलू   धीरे -धीरे खोलेगी
इतनी ज़्यादा दुखी दिखाई देती है, चिट्ठी पढ़ कर
ऐसा लगता है वह जा कर तक़िया अभी भिगो लेगी
- डॉ शरद सिंह
#Shayari #SharadSingh

01 April, 2017

असर लाया तो है कुछ-कुछ ...

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
चलो, अच्छा हुआ उसको समझ आया तो है कुछ-कुछ
मेरी #ग़ज़लें, मेरा #लहज़ा उसे भाया तो है कुछ-कुछ
बड़ी ही #बेरुखी से वो मिला करता था पहले तो
मगर शायद #दुआओं ने असर लाया तो है #कुछ_कुछ
- डॉ. शरद सिंह


#Shayari #SharadSingh