मंगलवार, जुलाई 10, 2018

दिल तो ठहरा एक जुलाहा - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

दिल तो ठहरा एक जुलाहा
ख़्वाब की चादर बुनता है
इश्क़ का ताना-बाना लेकर
रंग वफ़ा के चुनता है
- डॉ शरद सिंह


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