शनिवार, मार्च 17, 2018

मुझे नहीं .. डॉ शरद सिंह



Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
मुझे नहीं
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रात अपनी मरमरी आवाज़ में
कुछ कहती है
एक नाम लेती रहती है
नाम?
श्श..श्श..श्श...

रात को छूट है
मुझे नहीं
नाम तुम्हारा लेने की...
- डॉ शरद सिंह

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