सोमवार, जनवरी 08, 2018

दे दिये आंसू ... डॉ शरदसिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
दे दिये  आंसू , मगर  रूमाल  वो   न दे सका 
शख़्स वो, सोचो भला कैसे किसी का हो सका
जो अकेलेपन से लड़ता, जूझता दिन भर रहा  

रात आई, इक पहर भी  चैन  से  न सो सका
- डॉ शरदसिंह


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