सोमवार, दिसंबर 18, 2017

मैंने जो मांगा ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

मैंने जो मांगा
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जाड़े की रात ने
सूरज से मांगी 
एक सुबह
घर की दीवारों ने
मांगी अलावों से
गरमाहट
मैंने जो मांगा
अपनेपन में डूबी
इक आहट
तब से वो
मौन ओढ़ बैठा है
मैंने क्या उससे
कुछ ज़्यादा मांग लिया?

- डॉ शरद सिंह

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