शुक्रवार, नवंबर 24, 2017

इक अलाव जलने दो ... डॉ शरद सिंह


Winter ... Poetry of Dr Miss Sharad Singh
जाड़े को समर्पित मेरी एक कविता ....
इक अलाव जलने दो
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जाड़े की रात
ठिठुराते 
बड़े पहर 
चलने दो
जीवन में
गरमाहट
लाने को
यादों का
इक अलाव
जलने दो !
- डॉ शरद सिंह

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