बुधवार, अप्रैल 12, 2017

यादों का पहरा है ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
खुशियों के  दरवाज़े   यादों का पहरा है
मुस्काना मुश्क़िल है   दर्द बहुत गहरा है
कहते हैं लोग सभी ग़म भी मिट जाते हैं
मुमकिन ये कैसे हो   वक़्त लगे ठहरा है
- डॉ शरद सिंह


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