शनिवार, मार्च 01, 2014

भोली दादी ...

A Poem of Dr (Miss) Sharad Singh



Grandmother
 
Sitting at the door of his home

In the village

Will wait for her son,

Her grandson granddaughter

They have been turned into city
They lost in the city

Even grandma is sure

They will come one day just for her

Only just for her.....



Grandma is so innocent, do not!

- Dr Sharad Singh

4 टिप्‍पणियां:

  1. भोली दादी की आस नहीं टूटनी चाहिए ....एक दिन वे ज़रूर आयेगे .....कभी-कभी भोलापन भी ऐसे में जीने का सहारा बना रहता है....

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  2. सही कहा अदिति जी......
    हार्दिक आभार.

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  3. आस बसी है,
    और अभी तक,
    दादी माँ में साँस बसी है।

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  4. भोली दादी के मन की आस नहीं टूटेगी ... जानती है वो नहीं आयेगा फिर भी ...
    बहुत संवेदनशील ...

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