शुक्रवार, दिसंबर 20, 2013

दो शहर का फ़ासला ....


14 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. शुक्रिया धीरेन्द्र सिंह भदौरिया .....

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (22-12-2013) को "वो तुम ही थे....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1469" पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!!

    - ई॰ राहुल मिश्रा

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    1. राहुल मिश्रा जी,
      चर्चा मंच में मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

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  3. मुहब्बत के फलसफे को बाखूबी कहते ...

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