शुक्रवार, मई 10, 2013

उसकी यादें हैं समन्दर ....


4 टिप्‍पणियां:

  1. आप जितना खुबसूरत सोचती है उससे भी जियादा खुबसूरत स्केच कराती है आपकी कल्पना सत्यजित रे साहब की याद दिल जाती है आपकी कुछ चुनिन्दा लेख सहित चित्र में से एक है
    उसकी यादें हैं समन्दर ....

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