बुधवार, फ़रवरी 20, 2013

मेरे ख्वाबों के शीशे में .....


9 टिप्‍पणियां:

  1. सतसैया के दोहो में तीर जैसी मारक क्षमता है तो आपकी रचनाओं में भावों की उतनी ही तीक्ष्ण अनुभुति है, बहुत ही लाजवाब.

    रामराम.

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  2. वाह वाह ...बहुत सुन्दर ...हमेशा की तरह।

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  3. ख्यालों में अक्सर तनहा साया होता है
    तसव्वुर बन जाये वो हमसाया होता है

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