सोमवार, जुलाई 09, 2012

बुला रहे हैं मुझे .....


14 टिप्‍पणियां:

  1. ज़रूर याद रखा होगा सबने....
    माँ का घर कब पराया होता है....अब बिसराता है....

    सुन्दर भाव शरद जी
    सादर
    अनु

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत सुंदर भावनात्मक लाजबाब प्रस्तुति,,,,बधाई शरद जी.,,,,

    RECENT POST...: दोहे,,,,

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  4. जो दिल के रिश्ते होते हैं
    वो कभी नहीं खोते हैं

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  5. कुछ अलग हट के हैं ||
    सादर बधाई स्वीकारें ||

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  6. रिश्ते मानने से होते है होने से नहीं

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  7. खुल जाए जो बंध , वो गांठ होती है ?.
    न टूटे न खुले , वो मायका का रिश्ता ..?

    स्पेम में शायद कमेन्ट है कृपया ............

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  8. बहुत खूब , शानदार प्रस्तुति.

    कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारकर अपना शुभाशीष प्रदान करें , आभारी होऊंगा .

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  9. सुंदर शब्दों का चयन ,सुन्दर भाव अभिवयक्ति है आपकी इस रचना में
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  10. रिश्ते जागते रहते हैं ... बुलाते हैं ... दिल में जिन्दा रहते हैं ...

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