सोमवार, मार्च 19, 2012

शरमा कर .....


35 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्‍कुल सही कहा ...ब‍हुत ही बढि़या ...

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  2. चाँद शब्दों मन के भाव बिखेरती मुस्कान ....

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ...

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  3. मुस्कराकर शर्माना ।
    या शर्माकर
    मुस्कराना ।
    बना देती है दोनों-
    दीवाना
    मस्ताना ।।

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  4. बहुत सुन्दर..............

    प्यारे भाव.............

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  5. भाव तो भाव हैं ...कहने का ढंग और समझने का ढंग ...बस होना चाहिए....
    आपकी ये चंद पंक्तियाँ अथाह समुद्र की गहराई लिए होती हैं...बहुत डीनो बाद आ पाया हूँ आपके ब्लॉग पे...अच्छा लगा..

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  6. मुझे भी अन्यों की तरह आपकी रचना ने मुग्ध कर दिया... लेकिन कुछ शरारत भरी टिप्पणी करने के चक्कर में दो व्यंग्य लिख गया...

    क्षमाभाव के साथ व्यक्त कर रहा हूँ...

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  7. फोटो चेपकर

    लिख देना भी

    हो जाता है सब कुछ

    अब लेखन में... [१]



    लिखकर ...फोटू चेपना

    या चेपकर ... लिखना

    दोनों ही एक-दूसरे की मदद करते हैं .... कब? ...

    जब एक अभिव्यक्ति लूली और दूसरी लंगडी हो... [२]

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  8. मुझे इश्तहार सी लगतीं हैं...ये मोहब्बतों की कहानियां...
    जो कहा नहीं वो सुना करो...जो सुना नहीं वो कहा करो...

    सब कहना ज़रूरी नहीं...

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  9. बिल्कुल सच कहा आपने.

    यार्थार्थ को दर्शाती अभिवयक्ति.....

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  10. गहन भाव लिए उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ।

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  11. I AM SPEECHLESS AS IT IS.
    BUT BEAUTIFUL POST INCLUDING EMOTIONS AND FEELINGS.

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  12. जी,और ख़ाली शर्माना भी बहुत कुछ कह जाता है.

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  13. प्रेम के लड्डू मुंह में ही फूटतें हैं अन्दर -अन्दर .यह अन्दर की बात है .देह की, देहिक मुद्राओं की ,काया की अपनी मुस्कान और अभिव्यक्ति है .बेहतरीन शब्द चित्र प्रेम के अंकुरण का .

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  14. शरद जी,यही तो ही स्त्री का स्त्रीत्व. बधाई

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  15. वो मुस्कुरा दिए बस -

    और सब कुछ कह दिया -

    गीत में तेरा बनूंगी ,और गावन -हार भी ,

    बीन में तेरी बनूंगी ,बीन की झंकार भी ....
    कृपया यहाँ भी आयें -
    ram ram bhai

    बुधवार, 21 मार्च 2012
    गेस्ट आइटम : छंदोबद्ध रचना :दिल्ली के दंगल में अब तो कुश्ती अंतिम होनी है .

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  16. बहुत ही सुन्दर में आपके ब्लॉग पे पहली बार आया हु
    लेकिन आगे आता रहूँगा
    मेरे ब्लॉग पे भी आप आएंगे तो हमें अच्छा लगेगा
    http://vangaydinesh.blogspot.in/

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  17. बहुत सुन्दर .. इस मुस्कान के क्या कहने

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  18. बहुत ही सुन्‍दर । कुछ तस्‍वीरों की तलाश में आज आपका ब्‍लॉग हाथ आ गया। पढ़ा। पढ़कर ऐसा लगा कि कुछ ही पंक्तियों में इतनी सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति आज तक पढ़ने को नहीं मिली। पर बहुत सुन्‍दर लगी। आपकी कुछ चित्र पंक्तियां अपने फेसबुक पर लोड कर दी।

    http://writer-den.blogspot.in
    sanjay.rajpoot2010@facebook.com
    raghunath.singh.7524@facebook.com

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  19. बहुत ही सुन्‍दर । कुछ तस्‍वीरों की तलाश में आज आपका ब्‍लॉग हाथ आ गया। पढ़ा। पढ़कर ऐसा लगा कि कुछ ही पंक्तियों में इतनी सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति आज तक पढ़ने को नहीं मिली। पर बहुत सुन्‍दर लगी। आपकी कुछ चित्र पंक्तियां अपने फेसबुक पर लोड कर दी।

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