शुक्रवार, जनवरी 21, 2011

घर के बाहर घर की यादें

- डॉ. शरद सिंह

मेरी यह ग़ज़ल अल्पना वर्मा, डॉ. मोनिका शर्मा, पूर्णिमा वर्मन, डॉ. हरदीप संधु, डॉ. भवजोत कौर, सुधा ओम ढींगरा, इला प्रसाद, शिखा वार्ष्णेय, सुषम बेदी, ऊषाराजे सक्सेना, ज़क़िया ज़ुबेरी, तेजेन्द्र शर्मा, कृष्ण बिहारी आदि उन सभी की भावनाओं को समर्पित है जो भारत से बाहर रहते हुए भी भारत को हर पल जीते हैं।